Anonymous: How can we get grace of God? Swami Ram Swarup: By following Vedic path everybody got grace of God so you are also advised to follow Vedic path under guidance of learned acharya Anonymous: When I listed to Hare Krishna Hare Rama, I am filled with a different...
Swami Ram Swarupji’s books and other creations are available at Book Fair organized at Punjabi University Patiala. It started on Tuesday, December 07, 2021, and will be on till Sunday, December 12, 2021. The stall was also visited by Hon’ble Dr. Arvind,...
Rishi: Parnam babaji! I heard from somewhere that egg is veg. Is it really veg? Can we eat it for protein as I have bone & muscles weakness and the doctor had advised me to take eggs. Should I? Kindly show me the right path as I am confused. Parnam. Swami Ram...
उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।। (गीता श्लोक ६/५) इस प्रकार हे (पुरुष) शरीर में निवास करने वाली जीवात्मा (ते उद्यानं) तेरी उन्नति हो (न अवयानं) तेरी कभी अवनति ना हो (ते मनः तत्र मा गात्) तेरा मन वहाँ यमलोक में ना जाए...
योऽनधीत्य द्विजो वेदमन्यत्र कुरुते श्रमम्। स जीवन्नेव शूद्रत्वमाशु गच्छति सान्वयः।। (मनुस्मृति श्लोक २/१६८) अर्थात् जो स्वयं को द्विज अर्थात् ब्राह्मण, गुरु, संत आदि कहता है पर वेदों का अध्ययन नहीं किया बल्कि कोई और ही किताबें पढ़ने में श्रम करता है, वह जीवित रहता हुआ...
मअन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भव:। यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञ: कर्मसमुद्भव:।। (गीता ३/१४) अर्थ – अन्न से सब प्राणी होते हैं अर्थात् अन्न से सब प्राणी उत्पन्न होते हैं, अन्न की उत्पत्ति मेघ से होती है, मेघ अर्थात् वर्षा यज्ञ से होती है। यज्ञ कर्म से उत्पन्न...
महर्षि वाल्मीकि जी के संबंध में लोगों में एक कथा प्रचलित है कि वे रामायण की रचना करने से पहले डाकू थे। उनके सम्बन्ध में रामायण को ही प्रमाण माना जा सकता है क्योंकि जब प्रमाण की बात आती है तो दो ही प्रमाण माने जाते हैं – वेद और आप्त ऋषि। वेद ईश्वर का ज्ञान है और...
Arvind: Respected Guruji, Pranaams! I am doing Agnihotra Homa for last 6 months. I came to know that while your goodself were in the military service, you were doing sadhana and meditation and during one such time, while you were doing meditation in your house,...
न तस्य मायया च न रिपुरीशीत मर्त्यः । यो अग्नये ददाश हव्यदातये ॥ (सामवेद मंत्र १०४) जो मनुष्य देवों को हव्य पदार्थ देने के लिए, अग्नि के लिए आहुति सहित दान करता है, उसका शत्रु माया द्वारा भी शासन नहीं कर सकता। इस सामवेद मंत्र 104 में ईश्वर ने माया से छूटने का सरल परंतु...